बसंत पंचमी कब है ? शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि जाने ।

बसंत पंचमी का त्यौहार आते ही बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है और होली के आगमन का भी संकेत मिल जाता है । ज्योतिषाचार्य का मानना है कि बसंत पंचमी का दिन बहुत ही शुभ होता है और इस दिन से किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है । आज के दिन कई लोग गृह प्रवेश भी करते हैं । माना जाता है कि इस दिन कामदेव पत्नी रति के साथ पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए जो पति-पत्नी इस दिन भगवान कामदेव और देवी रति की पूजा करते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में कभी मुश्किलें नहीं आती हैं । मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन ब्रह्मा जी के मुख से विद्या कला, विज्ञान, ज्ञान और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है । बसंत पंचमी के दिन विद्यालयों में भी देवी सरस्वती की आराधना की जाती है । भारत के पूर्वी राज्यों में तो इस दिन घरों में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा की जाती है और फिर अगले दिन मूर्ति को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है । बसंत पंचमी को ही श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी भी कहा जाता है । भगवान विष्णु और मां सरस्वती देवी दोनों की पूजा का दिन गुरुवार अर्थात बृहस्पतिवार है अर्थात कहने का मतलब है कि बृहस्पतिवार को विष्णु भगवान सरस्वती देवी और साईं बाबा की पूजा की जाती है ।


 


सरस्वती मां का मूल मंत्र :-

                          

                             ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

                 

तिथि और शुभ मुहूर्त :-


बसंत पंचमी का त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है यानी कि पांचवें दिन मनाया जाता है । इस वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 16 फरवरी 2021 दिन मंगलवार की सुबह 3:36 से शुरू होगी और पंचमी तिथि का समापन अगले दिन यानी कि 17 फरवरी 2021 दिन बुधवार की सुबह 5:46 पर समापन होगा । पंचमी तिथि 16 फरवरी को पूरे दिन रहेगी । 

    बसंत पंचमी पर इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त लगभग 5:30 घंटे तक रहेगा । देश के अलग-अलग स्थानों पर समय के हिसाब से मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर तो जरूर हो जाता है यदि हम दिल्ली की बात करें तो दिल्ली में बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त 16 फरवरी की सुबह 6:59 से लेकर 16 फरवरी को ही दोपहर 12:35 तक रहेगा तथा उत्तर प्रदेश में बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त 16 फरवरी को प्रातः काल 6:49 से लेकर 16 फरवरी को ही 12:33 तक रहेगा ।


सरस्वती देवी मां की पूजन विधि :-



अब हम लोग बात करते हैं कि सरस्वती देवी मां की पूजन विधि कैसे की जाती है मां सरस्वती की पूजा से पहले इस दिन प्रातः काल नित्य कार्य अर्थात स्नानादि करके पीले वस्त्र धारण कर लीजिए उसके बाद अपने घर की पूजा स्थल को साफ करके सरस्वती देवी की मूर्ति अथवा चित्र को स्थापित करिए और उनके सामने कलश की स्थापना करके पहले कलश की पूजा करिए उसके बाद नौ ग्रह की पूजा करिए और फिर मां सरस्वती की उपासना करिए उसके बाद देवी मां की विधि पूर्वक स्नान कराइए और फिर सरस्वती देवी मां को श्रृंगार की वस्तुओं को चढ़ाइए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती देवी मां को सफेद वस्त्र अर्पित कीजिए और साथ में खीर अथवा दूध से बने हुए प्रसाद को सरस्वती देवी मां का भोग लगाइए और उसके बाद आरती करिए और फिर उनके सम्मुख खड़े होकर उनसे प्रार्थना करिए की "हे सरस्वती देवी मां मैं अज्ञानी हूं मुझे पूजा का विधि विधान अच्छी तरह से जानकारी नहीं है इसलिए इस पूजन विधि में अगर किसी भी प्रकार की त्रुटि हुई हो तो मुझे क्षमा करिएगा" और अंत में सभी भक्तों को सरस्वती देवी मां की प्रसाद का वितरण कीजिए । इस तरह से यह पूजन विधि समाप्त होती है




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                 ------ :: धन्यवाद :: ------






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