महामृत्युंजय मंत्र
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ
इस मंत्र का अर्थ है कि हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो हर श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं और पूरे जगत का पालन-पोषण करते हैं।
इस मंत्र का जाप करते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें । मंत्र का उच्चारण एक दम सही होना चाहिए । शुद्धता का ध्यान रखते हुए बहुत से लोग महामृत्युंजय मंत्र का जाप पंडित से करवाते है । महामृत्युंजय मंत्र का जाप आप कभी भी कर सकते है, लेकिन सोमवार भगवान शिव का दिन होता है और यह बहुत ही शुभ होता है। इसके अलावा सावन में महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यधिक फलदाई होता है क्योकि श्रावण का महीना भगवान शिव का दिन माना जाता है और पूरे श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप कभी भी कर सकते है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि, गृह क्लेश, ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसे स्थितियों में किया जाता है। भगवान शिव के महामृत्युंजय जाप से चमत्कारिक लाभ देखने को मिलते हैं। समस्याओं से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है।

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