हिंदू धर्म में स्वास्तिक का अपना एक अलग ही महत्व है । यह दो शब्दों से मिलकर बना होता है जिसमें पहला शब्द ‘शू’ का अर्थ होता है ‘शुभ’ और ‘अस्तिक’ का अर्थ होता है ‘होना’ अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ होता है ‘शुभ होना’ यानी कि ‘कल्याण होना’।
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| Swastik Chinh |
| इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य के शुभ अवसर पर स्वास्तिक चिन्ह बनाने की परंपरा आज से नहीं बल्कि सदियों से हिंदू धर्म में चली आ रही है । माना जाता है कि स्वास्तिक चिन्ह बनाने के दौरान उसकी चारभुजा समांतर रहती हैं और इन चारो भुजाओं का बहुत ही बड़ा महत्व है । धार्मिक में यह भुजाएं चारो दिशाओं का प्रतीक माना जाता है और कहा जाता है कि यह चार वेदों के अलावा चार पुरुषार्थ जिनमें धार्मिक अर्थ, काम और मोक्ष भी शामिल है । |
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इसलिए स्वास्तिक के द्वारा घर के वास्तु दोष को भी दूर किया जाता है जी हां अगर आपको लगता है कि आपके घर में वास्तु दोष आ गया है आपके घर में पैसा तो आता है लेकिन वह पैसा रुकता नहीं है अर्थात कहने का मतलब पैसा फालतू कार्यों में खर्च हो जाते हैं और कोई भी अच्छा कार्य नहीं हो पाता, घर के सदस्य हमेशा बीमार या परेशान रहते हैं, व्यक्ति मेहनत तो बहुत करता है लेकिन उसको उतनी सफलता नहीं मिलती है और वह जिस पर भरोसा करता है वही उसको धोखा देते है तो ऐसी स्थिति होने पर हो सकता है कि आपके घर में वास्तु दोष हो गया है तो वास्तु शास्त्री स्वास्तिक के चिह्न से दोष का निवारण करने की विधि को बताते हैं तो इस प्रकार के वास्तु दोष को दूर करने के लिए वास्तु शास्त्री के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ यानी अंदर और बाहर अष्ट धातु या तांबे का स्वास्तिक चिन्ह लगाकर इस वास्तु दोष को दूर किया जा सकता है यदि आप अपने घर में नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करना चाहते हैं तो आपको 9 इंच लंबा और चौड़ा सिंदूर से दरवाजे पर स्वास्तिक चिन्ह बनाना चाहिए इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करने लगती है लेकिन यदि आप धार्मिक कार्य कर रहे हैं और स्वास्तिक चिन्ह का प्रयोग कर रहे हैं यानी स्वास्तिक बना रहे हैं तो स्वास्तिक चिन्ह को हल्दी सिंदूर से ही बनाना चाहिए तथा त्यौहार वाले दिन स्वास्तिक चिन्ह बना रहे हैं तो लाल रंग के कुमकुम सिंदूर या रोड़ी से इसका निर्माण किया जाना चाहिए इससे देवी देवता बहुत ही ज्यादा प्रसन्न होते हैं और घर में प्रवेश करते हैं ।
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| उल्टा स्वास्तिक चिन्ह |
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यह चिन्ह बहुत ही शुभ चिन्ह है इसलिए इसे कभी भी अशुद्ध जगह पर नहीं बनाना चाहिए और ना ही कभी स्वास्तिक चिन्ह को उल्टा बनना चाहिए हां एक स्थिति में आप इसे उल्टा बना सकते हैं बहुत से लोग किसी देव स्थान, तीर्थ स्थान या किसी जागृत स्थान पर जाते हैं तो मनोकामना मांगते वक्त वहां उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बनाते हैं और जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वहां पर जाकर उसी स्थान पर पुनः सीधा वास्तविक चिन्ह बना दिया जाता है ।
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–––––: धन्यवाद :–––––


Bahut achha
जवाब देंहटाएंDhanyvad
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