स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाते हैं । स्वास्तिक चिन्ह बनाने का सही तरीका । Swastik chinh kaise banate hai । Swastik chinh banane ka sahi tarika

स्वास्तिक(卐) चिन्ह हिंदू धर्म में देवत्व और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।  यह एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "कल्याण के लिए अनुकूल"।  यह हिंदू धर्म में पवित्र प्रतीक में से एक है और दुनिया भर में 1.2 अरब लोगों (प्रत्येक 6 लोगों में से 1) द्वारा सभी अनुष्ठानों के लिए उपयोग किया जाता है।  

स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाते हैं । स्वास्तिक चिन्ह बनाने का सही तरीका । Swastik chinh kaise banate hai । Swastik chinh banane ka sahi tarika
स्वास्तिक चिन्ह


स्वास्तिक चिन्ह बनाने का सही तरीका
 

    जब भी घर में या कहीं और कोई पूजा पाठ किया जाता है तो उस समय स्वास्तिक चिन्ह को पूजा के स्थान पर तथा घर में दरवाजे के ऊपरी हिस्से यानी की चौखट पर बनाते हैं लेकिन स्वास्तिक का चिन्ह बनाते समय हमें जितना ज्ञान होता है उसी के अनुसार हम बना देते हैं तो आज आप लोगों को सही तरीका से स्वस्तिक चिन्ह बनाना बनाना बताया जाएगा क्योंकि गलत तरीके से स्वास्तिक चिन्ह बनाया जाता है तो वह अशुभ होता है अर्थात गलत तरीके से बना हुआ स्वास्तिक चिन्ह अशुभ होता है 

    हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शक्ति सौभाग्य समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है घर में अगर किसी भी प्रकार का वास्तु दोष होता है तो उसे ठीक करने के लिए स्वस्तिक चिन्ह का भी प्रयोग किया जाता है स्वास्तिक चिन्ह के प्रयोग से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है जिससे घर के सभी बिगड़े हुए काम तेजी से बढ़ने लगते हैं । अब हम ‘स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाया जाता है? ‘सही तरीके से स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाते हैं? ‘इसको बनाने का सही तरीका क्या है? आज आपको स्वास्तिक चिन्ह बनाने का गलत और सही दोनों तरीका बताया जाएगा । सबसे पहले गलत तरीका से लोग स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाते हैं यानी कि बहुत से लोग हैं जो स्वास्तिक चिन्ह बनाते हैं तो उनसे बहुत सी गलतियां हो जाती हैं गलतियां आप लोग ना करें इसीलिए यहां आपको पहले गलत तरीका बताया जाएगा  

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वीडियो देख स्वास्तिक चिन्ह का –



पहली बात तो यह जानिए कि स्वास्तिक चिन्ह जब भी बनाया जाता हैं तो अनामिका उंगली से बनाया जाता है मतलब यह की अंतिम उंगली जिसे कनिष्ठ कहते हैं कनिष्ठ के बगल वाली उंगली जो है उसे अनामिका उंगली बोलते हैं तो हमेशा स्वास्तिक चिन्ह अनामिका उंगली से ही बनाना चाहिए और स्वास्तिक चिन्ह को बनाते समय हल्दी, कुमकुम या सिंदूर का प्रयोग कर सकते हैं । बहुत से लोग क्या करते की पहले प्लस(+) का चिन्ह बना देते हैं और प्लस चिन्ह बनाने के बाद उसके चारो भुजा को मोड़ देते है और स्वास्तिक बनकर तैयार हो जाता है इस तरह बहुत से लोग हैं जो इस स्वास्तिक चिन्ह को ऐसे बनाते हैं जो तरीका बिल्कुल गलत है यानी कि यह तरीका खंडित माना जाता है । प्लस का चिन्ह बनाने से यह बीच में खंडित हो जायेगा यानी कि स्वास्तिक चिन्ह खंडित नहीं होना चाहिए अब आपको सही तरीका क्या है स्वास्तिक चिन्ह बनाने का उसको बताया जाएगा तो सबसे पहले अनामिका उंगली लेंगे  और सबसे पहले बाएं तरफ की भुजा बनाएंगे फिर दाएं तरफ की भुजा बनाएंगे । इस प्रकार से यह सही स्वास्तिक चिन्ह बन जायेगा इस स्वास्तिक चिन्ह से हमारी यह जो चार खंड हैं यह जो चार खंड बिंदु है यह हमारी 4 बिंदु जो हैं धर्म, अर्थ, समृद्धि और मंगल को दर्शाते हैं 

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स्वास्तिक चिन्ह कैसे बनाते हैं । स्वास्तिक चिन्ह बनाने का सही तरीका । Swastik chinh kaise banate hai । Swastik chinh banane ka sahi tarika
Swastik chinh

इस स्वास्तिक चिन्ह की एक खास बात और है वह खास बात यह है कि इस स्वास्तिक चिन्ह को जब आप कहीं देखेंगे तो स्वास्तिक चिन्ह के दोनो तरफ  दो–दो भुजाएं होती है उस दोनो भुजाओं को हमेशा नीचे से ऊपर की ओर बनाना चाहिए बहुत से लोग गलती क्या करते हैं कि ऊपर से नीचे की ओर बना देते हैं तो ऊपर से नीचे नहीं बनाना चाहिए जबकि नीचे से ऊपर की ओर यह दो भुजाएं बनानी चाहिए इसी तरह से हम यहां पर भी नीचे से ऊपर की ओर बनाएंगे और आप लोगो ने शायद इसे देखा होगा किसी दुकान पर या कहीं पर भी स्वास्तिक चिन्ह बनाया जाता है तो इसमें दो रेखाएं अलग-अलग होती हैं तो हम लोग यह नहीं समझते हैं कि इस स्वास्तिक चिन्ह में इसका मतलब क्या है तो स्वास्तिक चिन्ह के बाएं तरफ वाली पहली भुजा का मतलब यह है की यह गणेश जी की दो पत्नियों में से एक ‘रिद्धि’ है और दूसरी भुजा रिद्धि के पुत्र ‘शुभ’ हैं और स्वास्तिक चिन्ह के दाएं तरफ वाली दूसरी भुजा ‘सिद्धि’ और पहली भुजा सिद्धि के पुत्र ‘लाभ’ हैं । इसीलिए स्वास्तिक चिन्ह जब भी बनाया जाता है तो उसमें बाएं तरफ शुभ लिखा जाता है और दाहिने तरफ लाभ लिखा जाता है । स्वास्तिक चिन्ह में जो चार बिंदु होता है वह चार बिंदु चार प्रतीक होते है यानी कि अर्थ, धर्म, कर्म और मोक्ष यह चार प्रतीक है । 


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